
Introductions
भारत में Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) एक प्रमुख सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जिसकी शाखाओं में प्रतिदिन एक विशेष प्रार्थना गाई जाती है। यह प्रार्थना केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, त्याग, अनुशासन और समर्पण की भावना को जागृत करने का माध्यम है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की प्रार्थना (RSS Prarthana), जिसे आमतौर पर “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे” के नाम से जाना जाता है, संघ की शाखाओं में रोजाना गाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रार्थना है। यह प्रार्थना संस्कृत भाषा में रची गई है (अंतिम पंक्ति को छोड़कर, जो हिंदी में है), और इसका उद्देश्य मातृभूमि के प्रति समर्पण, राष्ट्र-सेवा का संकल्प और धर्म-रक्षा की भावना को जगाना है।
यह प्रार्थना सर्वप्रथम 1939 में तैयार की गई थी और 1940 में पुणे के संघ शिक्षा वर्ग में पहली बार गाई गई। नरहरि नारायण भिड़े द्वारा रचित इसकी मूल भावना भारत को विश्वगुरु बनाने और हिंदू समाज को संगठित करने की है। संघ के सभी कार्यक्रमों में इसे अनिवार्य रूप से गाया जाता है।
इस लेख में हम RSS प्रार्थना का मूल संस्कृत पाठ और उसका सरल हिन्दी अनुवाद समझेंगे।
मूल प्रार्थना (संस्कृत में)
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम् । महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ॥१॥
प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता इमे सादरं त्वां नमामो वयम् । त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयं शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये । अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत् श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्णमार्गं स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ॥२॥
समुत्कर्षनिःश्रेयसस्यैकमुग्रं परं साधनं नाम वीरव्रतम् । तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम् । विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिः विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम् । परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ॥३॥
॥ भारत माता की जय ॥
हिंदी अनुवाद (शब्दार्थ सहित)
प्रथम श्लोक हे वत्सल (प्यार करने वाली) मातृभूमि! मैं तुम्हें सदैव नमस्कार करता हूँ। हे हिन्दुभूमि! तुमने ही मुझे सुखपूर्वक पाला-पोषा है और बढ़ाया है। हे महामंगलमयी, पुण्यभूमि! तुम्हारे ही लिए यह शरीर गिरे (समर्पित हो जाए), तुम्हें बार-बार नमस्कार, नमस्कार!
द्वितीय श्लोक हे शक्तिमान प्रभु! हम हिन्दू राष्ट्र के अंग बनकर आदरपूर्वक तुम्हें नमस्कार करते हैं। तुम्हारे कार्य (राष्ट्र-सेवा) के लिए हमने कमर कस ली है, इसकी पूर्ति के लिए हमें शुभ आशीर्वाद दो। हे ईश्वर! हमें ऐसी अजेय शक्ति दो जो विश्व में विजयी हो, और ऐसा सुशील चरित्र दो जिससे समस्त जगत् नतमस्तक हो जाए। जो मार्ग काँटों से भरा हुआ सुना है, उसे हमने स्वयं स्वीकार किया है, उसे हमारे लिए सुगम (सरल) बना दो।
तृतीय श्लोक उत्कर्ष और नि:श्रेयस (सांसारिक उन्नति और आध्यात्मिक कल्याण) के लिए एकमात्र उग्र साधन है वीर-व्रत (वीरता का संकल्प)। हमारे अंतःकरण में अटूट ध्येय-निष्ठा स्फुरित हो, हमारे हृदय में तीव्र जागृति निरंतर बनी रहे। हमारी संयुक्त कार्य-शक्ति विजयी हो, जो इस धर्म की रक्षा करे। इस स्वराष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाने में तुम्हारी आशीष से हम समर्थ बनें।
अंतिम उद्घोष भारत माता की जय!
भावार्थ का सार
यह प्रार्थना केवल शब्द नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है। इसमें स्वयंसेवक मातृभूमि को माँ मानकर अपना सर्वस्व अर्पित करने का संकल्प लेता है। यह राष्ट्र की एकता, धर्म-रक्षा, व्यक्तिगत त्याग, सेवा और विश्व-कल्याण की कामना करती है। अंत में “भारत माता की जय” का उद्घोष राष्ट्रभक्ति की पराकाष्ठा दर्शाता है।
संघ के लाखों स्वयंसेवक प्रतिदिन इसे गाकर अपने आपको राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित करते हैं। यदि आपने कभी शाखा में सुना है या शंकर महादेवन जी द्वारा गाया गया संस्करण सुना है, तो उसकी गहराई और भावना अवश्य महसूस की होगी।

🇮🇳 RSS प्रार्थना का महत्व
- राष्ट्रभक्ति की भावना: यह प्रार्थना देश के प्रति समर्पण सिखाती है।
- अनुशासन और एकता: सामूहिक रूप से गाई जाने वाली यह प्रार्थना संगठनात्मक शक्ति बढ़ाती है।
- त्याग और सेवा: इसमें स्वयं को राष्ट्र के लिए समर्पित करने की प्रेरणा दी जाती है।
- चरित्र निर्माण: यह व्यक्ति के भीतर नैतिकता और जिम्मेदारी विकसित करती है।

