मध्य पूर्व में पिछले करीब चार हफ्तों से जारी खूनी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान किया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना को ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर किसी भी सैन्य हमले को पांच दिनों के लिए टालने का आदेश दिया गया है। Al Jazeera
ट्रंप ने Truth Social पर किया बड़ा ऐलान
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने Truth Social प्लेटफॉर्म पर कैपिटल लेटर्स में लिखा — “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान ने पिछले दो दिनों में मध्य पूर्व में अपनी शत्रुता के पूर्ण और संपूर्ण समाधान के बारे में बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत की है।” Al Jazeera
इसके बाद CNBC के जो कर्नेन के साथ एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि “हम ईरान के साथ एक डील करने के बहुत इरादे से काम कर रहे हैं।” CNBC
क्या था पूरा मामला?
ट्रंप ने शनिवार को ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि वह रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोले, वरना उसके पावर प्लांट्स पर हमले किए जाएंगे। CNBC
होर्मुज एक संकरा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। दुनिया का करीब 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। CNBC इस जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई थी।
ईरान का पलटवार — “कोई बात नहीं हुई”
हालांकि ट्रंप के दावे को ईरान ने सिरे से नकार दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई है। Axios
ईरानी विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस कदम को “ऊर्जा कीमतें कम करने और अपनी सैन्य योजनाओं को लागू करने के लिए समय खरीदने की कोशिश” करार दिया। NBC News
एक अमेरिकी सूत्र के अनुसार, तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान पिछले दो दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा रहे थे। इन तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से अलग-अलग बात की। Axios
इजरायल ने जारी रखे हमले
ट्रंप के इस ऐलान के बावजूद युद्ध थमा नहीं। ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद इजरायली वायु सेना ने तेहरान में नई बमबारी शुरू कर दी। इजरायली सेना ने कहा कि वह “ईरानी शासन के इंफ्रास्ट्रक्चर” को निशाना बना रही है। The National
वैश्विक ऊर्जा संकट की चेतावनी
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने सोमवार को चेतावनी दी कि इस युद्ध से तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक “बड़े, बड़े खतरे” का सामना करना पड़ रहा है। NPR
जर्मनी ने जताई राहत
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को कहा कि वे ट्रंप के इस कदम के लिए “आभारी” हैं। मर्ज ने कहा — “मैंने ट्रंप को ईरान के पावर प्लांट पर हमले की घोषणा को लेकर अपनी चिंताएं बताई थीं। मुझे खुशी है कि उन्होंने इसे पांच दिनों के लिए टाल दिया।” CBS News
क्या है आगे की राह?
ट्रंप ने कहा कि बातचीत पूरे हफ्ते जारी रहेगी और पावर प्लांट पर हमले की रोक “जारी बैठकों और चर्चाओं की सफलता पर निर्भर करेगी।” NBC News
अल जज़ीरा के तेहरान संवाददाता ने कहा कि ईरान के इस प्रस्ताव को ठुकराने की संभावना बेहद कम है। उन्होंने कहा — “ईरानी इस युद्ध को जारी नहीं रखना चाहते। अगर ठोस गारंटी मिले और भविष्य में आक्रामकता न हो, तो ईरान ‘ना’ नहीं कहेगा।” Al Jazeera
युद्ध का भयावह आंकड़ा
अब तक मध्य पूर्व में 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। ईरान में इजरायली और अमेरिकी हमलों में 1,200 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं। लेबनान में 1,000 और इजरायल में 15 लोगों की मौत हुई है। 13 अमेरिकी सैनिक भी इस युद्ध में शहीद हुए हैं। NBC News
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अगले पांच दिनों तक अमेरिकी सेना ईरान के किसी भी पावर प्लांट या ऊर्जा ढांचे पर कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगी। ट्रंप के इस बयान के बाद मध्य-पूर्व में तनाव के बीच कुछ राहत की उम्मीद जगी है।
ट्रंप ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस से जारी बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा —
“हम अगले पांच दिनों तक ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना नहीं बनाएंगे। हम देखना चाहते हैं कि ईरान बातचीत की मेज पर आता है या नहीं।”
ट्रंप का यह बयान उस वक्त आया जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर था और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोत तैनात थे।
क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था। अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी, जिसमें बिजली संयंत्र और तेल रिफाइनरियां भी शामिल थीं।
हालांकि, अब ट्रंप प्रशासन ने यह संकेत दिया है कि वह कूटनीतिक रास्ते को थोड़ा और मौका देना चाहता है।
ईरान की प्रतिक्रिया
तेहरान की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से खबर है कि —
- ईरान किसी भी शर्त के साथ बातचीत के लिए तैयार नहीं है।
- ईरान ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है।
- ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अपने मिसाइल दस्तों को सतर्क कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर
संयुक्त राष्ट्र, रूस और चीन सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। यूरोपीय संघ ने भी एक आपातकालीन बैठक बुलाई है जिसमें ईरान संकट पर चर्चा होगी।
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले पांच दिन बेहद अहम हैं —
- अगर ईरान बातचीत के संकेत देता है तो युद्धविराम की संभावना बढ़ेगी।
- अगर ईरान ने कोई जवाबी कार्रवाई की तो अमेरिका पूरी ताकत से जवाब दे सकता है।
- तेल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा क्योंकि कच्चे तेल में उछाल पहले से ही देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
यह पांच दिन का विराम एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक खिड़की खोलता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ईरान और अमेरिका वाकई किसी समझौते तक पहुंच पाएंगे — या यह महज एक अस्थायी राहत है? दुनिया की नजरें अब इस पांच दिन की बातचीत पर टिकी हैं।

